शेयर बाजार में अपर सर्किट (Upper Circuit) और लोअर सर्किट क्या होता है? पूरी जानकारी
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अगर आप शेयर बाजार (Stock Market) में ट्रेडिंग या निवेश करते हैं, तो आपने कभी-कभी जरूर देखा होगा कि कोई शेयर अचानक रॉकेट की तरह बहुत तेजी से ऊपर भागने लगता है या फिर अचानक धड़ाम से नीचे गिर जाता है और कुछ ही मिनटों में उसमें खरीद-बिक्री (Buying & Selling) पूरी तरह से बंद हो जाती है।
अक्सर नए निवेशकों के मन में यह सवाल आता है कि आखिर ऐसा क्यों होता है? उनके शेयर बिक क्यों नहीं रहे हैं या खरीद क्यों नहीं पा रहे हैं? इस पूरी प्रक्रिया को शेयर बाजार की भाषा में अपर सर्किट (Upper Circuit) और लोअर सर्किट (Lower Circuit) कहा जाता है।
आज के इस लेख में हम बहुत ही सरल हिंदी में विस्तार से जानेंगे कि अपर और लोअर सर्किट क्या होता है, यह क्यों लगता है, इसके क्या नियम हैं और निवेशकों को इससे क्या सावधानी रखनी चाहिए।
1. अपर सर्किट (Upper Circuit) क्या होता है? (What is Upper Circuit)
जब शेयर बाजार में किसी कंपनी के शेयर की मांग (Demand) अचानक बहुत ज्यादा बढ़ जाती है और हर कोई उसे खरीदना चाहता है लेकिन बेचने वाला कोई नहीं होता, तब उस शेयर में अपर सर्किट लग जाता है।
आसान शब्दों में: एक दिन में शेयर का दाम बढ़ने की एक अधिकतम सीमा (Limit) तय होती है। जब शेयर का भाव उस अधिकतम सीमा पर पहुँच जाता है, तो एक्सचेंज (NSE/BSE) उस शेयर के दाम को और अधिक बढ़ने से रोकने के लिए ट्रेडिंग पर अस्थायी रोक लगा देता है। इसके बाद उस दिन उस शेयर का भाव उससे ऊपर नहीं जा सकता।
अपर सर्किट लगने पर क्या होता है?
बिक्री बंद: उस शेयर के जितने भी सेलर (बेचने वाले) होते हैं, वे बाजार से हट जाते हैं क्योंकि वे और महंगे दाम पर बेचना चाहते हैं।
सिर्फ खरीदार: बायर्स (खरीदने वाले) की लंबी कतार (Order Queue) लगी रहती है, लेकिन शेयर न मिलने के कारण ट्रेड रुक जाता है।
2. लोअर सर्किट (Lower Circuit) क्या होता है? (What is Lower Circuit)
अपर सर्किट के ठीक विपरीत लोअर सर्किट होता है। जब किसी बुरी खबर या पैनिक की वजह से बाजार में किसी शेयर को बेचने वालों (Sellers) की बाढ़ आ जाती है और उसे खरीदने वाला कोई नहीं होता, तब उस शेयर में लोअर सर्किट लगता है।
आसान शब्दों में: एक दिन में शेयर का भाव गिरने की भी एक सीमा तय होती है। जब शेयर गिरते-गिरते उस निचली सीमा पर पहुँच जाता है, तो और ज्यादा गिरावट को रोकने के लिए उस पर लोअर सर्किट लग जाता है।
लोअर सर्किट लगने पर क्या होता है?
फंस जाता है पैसा: अगर आपके पास वो शेयर है और आप उसे बेचना चाहते हैं, तो आप उसे बेच नहीं पाएंगे क्योंकि बाजार में उस कीमत पर खरीदने वाला कोई खरीदार मौजूद नहीं होता। आपका आर्डर 'Pending' में पड़ा रहता है।
3. सर्किट लगने पर क्या हम शेयर खरीद या बेच सकते हैं? (Important Doubt)
नए लोगों के मन में यह सवाल सबसे ज्यादा होता है कि क्या सर्किट लगने के बाद शेयर खरीदे या बेचे जा सकते हैं?
अपर सर्किट में: आप उस दिन और शेयर नहीं खरीद सकते (क्योंकि कोई बेचने वाला नहीं है), और अगर आपके पास पहले से वो शेयर है तो आप उसे होल्ड करके रख सकते हैं या बेचने का आर्डर लगा सकते हैं।
लोअर सर्किट में: आप उस शेयर को बेच नहीं सकते (क्योंकि कोई खरीदने वाला नहीं है), और आप उसे चाहकर भी उस दिन और नहीं खरीद सकते क्योंकि ट्रेडिंग रुक जाती है।
4. क्या सर्किट पूरे दिन रहता है या बीच में खुल सकता है? (Does Circuit Open Again?
ज्यादातर मामलों में: अगर किसी शेयर में बहुत ज्यादा पैनिक (बिकवाली) या तगड़ी डिमांड है, तो वह सर्किट पूरे दिन यानी मार्केट बंद होने तक वैसे ही बना रहता है। ऐसी स्थिति में उस दिन उस शेयर में और कोई सौदा नहीं होता।
कुछ खास मामलों में: अगर लोअर सर्किट लगने के बाद कंपनी की तरफ से कोई अच्छी खबर आ जाए या बाजार का मूड अचानक सुधर जाए, तो कुछ शेयरों का लोअर सर्किट टूट जाता है और खरीदार आने पर ट्रेडिंग फिर से शुरू हो जाती है। अगर सर्किट नहीं खुलता है, तो नया भाव अगले दिन मार्केट खुलने पर ही तय होता है।
पेंडिंग ऑर्डर्स का क्या होता है?अगर दिनभर शेयर में सर्किट लगा रहता है और आपका आर्डर एग्जीक्यूट (पूरा) नहीं होता है, तो मार्केट बंद होने के बाद आपका वह पेंडिंग आर्डर अपने आप रद्द (Cancel) हो जाता है। अगले दिन आपको नया आर्डर लगाना पड़ता है।
5. सर्किट लिमिट कितनी होती है? (Circuit Limits in Indian Stock Market)
भारत में शेयर बाजार को नियंत्रित करने वाली संस्था SEBI (सेबी) और स्टॉक एक्सचेंजेस (NSE & BSE) ने हर शेयर के लिए सर्किट की सीमा तय कर रखी है, ताकि बाजार में बहुत ज्यादा अफरा-तफरी न मचे:
2% और 5% सर्किट वाले शेयर: ज्यादातर छोटी कंपनियों (Small Cap) या पेनी Stocks (Penny Stocks) में 2% या 5% का सर्किट होता है, क्योंकि इनमें मैनिपुलेशन का खतरा ज्यादा होता है।
10% और 20% सर्किट वाले शेयर: अच्छी और बड़ी कंपनियों (Large Cap / Mid Cap) के शेयरों में सर्किट की सीमा 10% या 20% तक होती है।
नो-सर्किट शेयर (No Circuit): निफ्टी-50 (Nifty 50) की जो दिग्गज कंपनियां होती हैं (जैसे Reliance, TCS, HDFC Bank), उनके शेयरों में कोई फिक्स सर्किट लिमिट नहीं होती, बल्कि उनमें मार्केट-वाइड इंडेक्स सर्किट (Market-wide Index Circuit) के नियम लागू होते हैं।
6. सर्किट लिमिट कब और क्यों लगती है? (Why Circuit Filters are Important)
अचानक आई खबरें (News/Results): जब किसी कंपनी का तिमाही रिजल्ट उम्मीद से बहुत ज्यादा अच्छा या बहुत खराब आता है, तो शेयरों में एकतरफा तेजी या मंदी आ जाती है।
ऑपरेटर का खेल (Pump and Dump): कई छोटी कंपनियों के शेयरों में कुछ लोग आपस में मिलकर मांग बढ़ा देते हैं (Upper Circuit), और खुद बेचकर निकल जाते हैं, जिससे आम निवेशक लोअर सर्किट में फंस जाते हैं।
मार्केट क्रैश (Market-wide Circuit): अगर पूरा शेयर बाजार (Sensex/Nifty) एक साथ बहुत बुरी तरह गिर जाए, तो पूरे देश के शेयर बाजार में ट्रेडिंग कुछ समय के लिए रोक दी जाती है ताकि निवेशकों का पैसा पूरी तरह से डूबने से बचाया जा सके।
7. सर्किट लगने पर निवेशक क्या करें और क्या न करें? (Important Tips for Investors)
लोअर सर्किट में कभी पैनिक न करें: अगर आपके किसी शेयर में लोअर सर्किट लग गया है और आप बेचना चाह रहे हैं, तो तुरंत घबराकर गलत कदम न उठाएं। लगातार लोअर सर्किट वाले शेयरों से दूरी ही भलाई है।
पेनी शेयरों से सावधान रहें: कम कीमत वाले शेयरों में अपर और लोअर सर्किट का खेल बहुत होता है। इनमें पैसा लगाने से पहले फंडामेंटल जरूर चेक करें।
स्टॉप लॉस का इस्तेमाल करें: अगर आप ट्रेडिंग करते हैं, तो हमेशा स्टॉप लॉस लगाकर रखें ताकि लोअर सर्किट लगने से पहले आपका ट्रेड कट जाए।
यदि आप शेयर बाजार के जोखिमों से बचकर अनुशासित निवेश करना चाहते हैं, तो म्यूचुअल फंड एक बेहतरीन विकल्प है। इसके बारे में विस्तार से जानने के लिए आप हमारी म्यूचुअल फंड में SIP कैसे शुरू करें? 2026 की सबसे आसान और पूरी महा-गाइड पढ़ सकते हैं।
निष्कर्ष (Conclusion)
शेयर बाजार में अपर और लोअर सर्किट निवेशकों की सुरक्षा के लिए बनाए गए एक सेफ्टी वाल्व की तरह हैं। यह बाजार को अचानक बहुत ज्यादा टूटने या बेकाबू होने से बचाते हैं। एक समझदार निवेशक वही है जो ऐसे शेयरों में निवेश करे जिनका बिजनेस मजबूत हो, ताकि उसे सर्किट या पैनिक की स्थिति का सामना न करना पड़े।
उम्मीद है कि अपर और लोअर सर्किट से जुड़ी यह पूरी जानकारी आपको पसंद आई होगी। इसे अपने दोस्तों और साथी निवेशकों के साथ जरूर शेयर करें!
Disclaimer / अस्वीकरण:
भाई, यह लेख सिर्फ और सिर्फ आपकी जानकारी और शिक्षा के उद्देश्य से लिखा गया है। शेयर बाजार और म्यूचुअल फंड में निवेश करना वित्तीय जोखिमों के अधीन है। बाजार में उतार-चढ़ाव आते रहते हैं, इसलिए किसी भी स्कीम या फंड में अपना पैसा लगाने से पहले खुद की रिसर्च (DIY) जरूर करें या अपने सर्टिफाइड फाइनेंशियल एडवाइजर (Financial Advisor) से सलाह जरूर लें। हमारी कोई जिम्मेदारी नहीं है।


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